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रूस में भारतीय छात्रों को शोषण: मास्को से लेकर रूस के कॉलेज तक, भारतीय छात्रों को क्यों हो रही खतरनाक समस्याएं

Satyakhabarindia

रूस में भारतीय छात्रों को शोषण: हाल ही में रूस में चार भारतीय छात्रों पर चाकू से हमला हुआ है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा ध्यान आकर्षित किया है। यह घटना भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। विदेश मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में भारतीय छात्रों द्वारा दर्ज कराए गए 350 शिकायतों में से आधे से अधिक शिकायतें रूस से आई हैं, खासकर मास्को से। 2025 में विश्व के 196 देशों से 350 शिकायतें आईं, जिनमें से 200 से ज्यादा केवल रूस से थीं। इस बढ़ते खतरे ने देश में चिंता को और बढ़ा दिया है।

भारतीय छात्रों पर हो रहा है नस्लीय भेदभाव और शोषण

रूस में अध्ययनरत अधिकांश भारतीय मेडिकल छात्र राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों से आते हैं। रूस में ट्यूशन फीस कम और प्रवेश प्रक्रिया सरल होने के कारण यह देश मेडिकल शिक्षा के लिए लोकप्रिय बन गया है। लेकिन हाल के वर्षों में छात्र शिकायतों में वृद्धि ने उनकी सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स एसोसिएशन के सदस्यों ने व्यापक नस्लीय भेदभाव, शोषण और समर्थन की कमी की बात स्वीकार की है। कुछ विश्वविद्यालय नियमों का उल्लंघन कर 1,200 से अधिक छात्रों को भर्ती करके बाद में निकाल देते हैं, जो एक गंभीर समस्या है।

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बढ़ती शिकायतों के बीच छात्र सुरक्षा पर चिंताएं

विदेश में भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं। 2023 में भारतीय छात्रों के खिलाफ 68 हमलों की शिकायतें आई थीं, जो 2024 में 78 और 2025 में बढ़कर 201 तक पहुंच गईं। इस मामले पर लोकसभा में मंत्री राज्य मंत्री किर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि विदेशों में भारतीय मिशनों में समर्पित अधिकारी तैनात हैं। ये अधिकारी नियमित रूप से छात्रों से संपर्क में रहते हैं और उन्हें उनके ठहराव के दौरान आने वाली चुनौतियों और जोखिमों से अवगत कराते हैं। इसके अलावा, मिशनों के प्रमुख और उच्चस्तरीय राजदूत विदेशी शैक्षणिक संस्थानों का दौरा करते हैं ताकि भारतीय छात्रों से संवाद किया जा सके।

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सरकार की कोशिशें और आगे की राह

विदेश मंत्रालय भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर गंभीर है और सभी संबंधित देशों से छात्र सुरक्षा को लेकर सहयोग की मांग करता है। रूस जैसे देशों में भारतीय छात्र समुदाय को बेहतर समर्थन देने के लिए मिशनों द्वारा नियमित बैठकें और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा, छात्र संघों के साथ मिलकर शैक्षणिक संस्थानों में छात्र अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि केवल प्रशासनिक प्रयासों से ही समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि छात्र सुरक्षा के लिए ठोस नीतियों और कड़े नियमों की भी जरूरत है।

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